
नई दिल्ली, 1 अप्रैल (हि.ला.)। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणा के अनुरूप वैश्विक व्यापार व्यवधानों से निपटने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) की पात्र इकाइयों को घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) में निर्मित वस्तुओं की बिक्री पर एकमुश्त राहत उपाय प्रदान किया है। यह राहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक प्रभावी रहेगी और इसे सीमा शुल्क अधिसूचना के माध्यम से लागू किया गया है।
इस योजना के तहत उन परिचालनशील SEZ इकाइयों को लाभ मिलेगा जिन्होंने 31 मार्च 2025 तक उत्पादन शुरू कर दिया था। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि रियायती सीमा शुल्क दरों का निर्धारण करते समय घरेलू टैरिफ क्षेत्र में कार्यरत उद्योगों के लिए समान अवसर और प्रतिस्पर्धा संतुलन बनाए रखा जाए।
राहत योजना के अंतर्गत अधिसूचित वस्तुओं पर सीमा शुल्क दरों में उल्लेखनीय कमी की गई है। उदाहरण के तौर पर 7.5% की मौजूदा दर को घटाकर 6.5%, 10% को 9%, 12.5%–15% को 10%, 20% को 12.5% तथा 30%–40% के बीच की दरों को 20% तक सीमित किया गया है। इससे निर्यात-उन्मुख इकाइयों को नकदी प्रवाह और बाजार पहुंच में मदद मिलने की उम्मीद है।
योजना के तहत यह अनिवार्य किया गया है कि पात्र इकाइयों द्वारा निर्मित वस्तुओं में कम से कम 20% का मूल्यवर्धन होना चाहिए। साथ ही निर्यात को प्राथमिकता बनाए रखते हुए DTA में बिक्री की सीमा तय की गई है—रियायती दरों पर की गई घरेलू बिक्री पिछले तीन वित्तीय वर्षों में किसी एक वर्ष के उच्चतम वार्षिक निर्यात मूल्य (FOB) के 30% से अधिक नहीं हो सकेगी।
यह राहत स्वचालित और फेसलेस असेसमेंट प्रणाली के माध्यम से लागू की जाएगी, जिससे प्रक्रियाएं तेज और पारदर्शी बनेंगी। घरेलू उद्योगों के हितों की रक्षा के लिए कुछ संवेदनशील क्षेत्रों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
सरकार का मानना है कि यह कदम वैश्विक व्यापार में अस्थिरता के बीच निर्यात-उन्मुख विनिर्माण को समर्थन देगा, निवेश और उत्पादन को बढ़ावा देगा तथा भारत के औद्योगिक और निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती प्रदान करेगा।