वैश्विक आपूर्ति चिंताओं के बीच भारत की बायोटेक संभावनाओं पर चर्चा

वैश्विक आपूर्ति चिंताओं के बीच भारत की बायोटेक संभावनाओं पर चर्चा

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नई दिल्ली, 4 अप्रैल (हि.ला.)। भारत में मधुमेह देखभाल और स्वदेशी बायोमैन्युफैक्चरिंग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं। "इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन" (IDF) के अध्यक्ष-निर्वाचित डॉ. नीति पाल ने केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह से भेंट की और स्वदेशी बायोसिमिलर इंसुलिन उत्पादन, निरंतर ग्लूकोज मॉनिटरिंग (CGM) उपकरणों और मधुमेह से संबंधित बायोमैन्युफैक्चरिंग संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

बैठक में वैश्विक स्तर पर इंसुलिन उत्पादन की सीमितता और बढ़ती मांग के कारण उत्पन्न आपूर्ति चिंताओं पर जोर दिया गया। डॉ. पाल ने उल्लेख किया कि प्रमुख बहुराष्ट्रीय कंपनियां GLP-1 जैसी नई थेरेपी पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं, जिससे पारंपरिक इंसुलिन की आपूर्ति बाधित हो रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वैश्विक बाजार में इंसुलिन उत्पादन केवल कुछ कंपनियों तक सीमित है, जिससे इसकी पहुंच और किफायतीपन पर दबाव बढ़ता है, खासकर टाइप 1 मधुमेह रोगियों के लिए, जिन्हें आजीवन इंसुलिन थेरेपी की आवश्यकता होती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर स्वदेशी इंसुलिन उत्पादन की भूमिका और महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में फार्मास्यूटिकल्स और मेडिकल डिवाइसेज के क्षेत्र में मजबूत तकनीकी क्षमता मौजूद है, लेकिन घरेलू इंसुलिन विनिर्माण अभी सीमित है। मंत्री ने इसके विस्तार की आवश्यकता को राष्ट्रीय और वैश्विक जिम्मेदारी दोनों के रूप में देखा। उन्होंने यह भी कहा कि जैव प्रौद्योगिकी विभाग पहले से ही उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों का समर्थन कर रहा है और भारतीय कंपनियों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं।

चर्चा में मधुमेह देखभाल प्रौद्योगिकियों जैसे CGM उपकरण और इंसुलिन पंप का महत्व भी शामिल था। डॉ. पाल ने कम लागत वाले उपकरणों के वैश्विक विस्तार और चीन जैसे देशों की प्रतिस्पर्धा पर ध्यान आकर्षित किया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत तकनीकी रूप से सक्षम है और घरेलू पारिस्थितिकी तंत्र में किफायती उपकरणों के विकास के लिए उद्योग भागीदारी और लक्षित समर्थन की आवश्यकता है।

दोनों पक्षों ने शोधकर्ताओं, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय भागीदारों के बीच सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की। इसमें क्लिनिकल ट्रायल, तकनीकी विकास और वित्तपोषण मॉडल शामिल हैं। मंत्री ने जुलाई में डॉ. पाल के भारत दौरे के दौरान एक हितधारक बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे उत्पादन बढ़ाने और वैश्विक वितरण मार्गों की खोज संभव हो सके।

यह बैठक भारत के बायोमैन्युफैक्चरिंग आधार को मजबूत करने और मधुमेह के बढ़ते बोझ को संबोधित करने की नीतिगत प्राथमिकताओं को दर्शाती है। स्वदेशी बायोसिमिलर इंसुलिन और किफायती मेडिकल डिवाइसों पर ध्यान देने से मधुमेह रोगियों के लिए उपचार की समान और सुलभ पहुंच सुनिश्चित होगी, जिससे भारत वैश्विक मधुमेह देखभाल में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर सकता है।

 
 

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