बाबा रामदेव ने कहा, जन-जन के भीतर दिव्यता जागृत करने की जरुरत

बाबा रामदेव ने कहा, जन-जन के भीतर दिव्यता जागृत करने की जरुरत

Share this post:

 

हरिद्वार, 26 मार्च (आईएएनएस)। चैत्र नवरात्रि समापन के पावन अवसर पर पतंजलि योगपीठ में 'नारी शक्ति' का भव्य कार्यक्रम आयोजित करवाया गया। इस मौके पर योगगुरु बाबा रामदेव ने सभी कन्याओं का पूजन कर उन्हें भोग लगाया।

बाबा रामदेव ने इस दौरान आईएएनएस के साथ बातचीत की और 'सनातन जागरण' का संदेश दिया। उन्होंने बातचीत की शुरुआत में सभी देशवासियों को नवरात्रि और राम नवमी की शुभकामनाएं देते हुए कहा, "इस पावन अवसर पर हर किसी के भीतर राम का रामत्व, कृष्ण का कृष्णत्व, हनुमान का हनुमतत्व, शिव का शिवत्व और मां भवानी, दुर्गा, भगवती और सरस्वती की दिव्यता स्थापित हो। यही सनातन धर्म का मूल तत्व है।"

उन्होंने कहा कि लोग गर्व से तो कह देते हैं कि हम हिंदू हैं, सनातनी हैं, लेकिन हिंदू और सनातन का असली मूल है भगवान और भगवती की भगवत्ता। उन्होंने कहा, "जब हर व्यक्ति में राम जैसा रामत्व, कृष्ण जैसा कृष्णत्व, हनुमान जैसा हनुमतत्व और शिव जैसा शिवत्व जागृत हो जाएगा, तब हर बेटी भगवती का स्वरूप बनेगी और हर बेटा राम का स्वरूप बनेगा।"

उन्होंने कहा, "'शिवोहम, शिवोहम, आत्माहम, शुद्धोहम, बुद्धोहम' वाला पवित्र चरित्र जब जन-जन में प्रकट होगा, तभी सनातन संस्कृति अपना सच्चा रूप लेगी। यह हमारे देश को विश्वगुरु, जगतगुरु और आर्यवर्त बना देगा।"

बाबा रामदेव ने कहा कि आज के समय में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के कारण देश के युवाओं और बच्चों का चरित्र खराब किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "मैं माता-पिता से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों को सोशल मीडिया पर ध्यान भटकने के बजाय पूर्वजों, ऋषि-मुनियों, वीरों और वीरांगनाओं के चरित्र के बारे में बताएं। नवरात्रि और राम नवमी जैसे सांस्कृतिक पर्वों का उपयोग बच्चों को अपनी महान विरासत का ज्ञान कराने में करें। उन्हें चरित्र और पवित्रता की शिक्षा दें। जब युवा चरित्रवान होंगे, तभी सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण होगा।"

उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों को अपनाकर ही हम अपनी संस्कृति को मजबूत बना सकते हैं। युवाओं को सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव से बचना चाहिए और सकारात्मक सांस्कृतिक मूल्यों को अपनाना चाहिए।

 

स्पेशल रिपोर्ट

Stay Connected

Popular News